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Paranjoy Guha Thakurta

फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए फेसबुक कुछ नहीं करना चाहता

फेसबुक का पूरा कारोबारी मॉडल सूचनाओं को वायरल बनाकर इससे पैसे कमाने पर आधारित है। सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता

Date published: February 11, 2019Publication: NewsClick Link to original article

मिशी चौधरी सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर की कानूनी निदेशक हैं। नई दिल्ली और न्यूयॉर्क में रहने वाली मिशी चौधरी डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनके जैसे स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को यह लगता है कि फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म को लोगों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में काफी कुछ कर सकता है।

वे कहती हैं कि फेसबुक को पहला काम तो यही करना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति को बगैर उसकी अनुमति के किसी भी फेसबुक समूह का सदस्य नहीं बनाया जा सके। अभी बगैर पहले से अनुमति लिए किसी को किसी फेसबुक समूह का सदस्य बनाया जा सकता है।

वे कहती हैं, ‘सभी तकनीकी कंपनियों की तरफ फेसबुक को भी यही लगता है कि सभी समस्याओं का समाधान तकनीक के जरिये किया जा सकता है। लेकिन कई बार चीजें इतनी सरल नहीं होती हैं।’ फेसबुक ने पहले भी अपने प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी खबरों के प्रसार की समस्या के समाधान की बात तकनीकी उपायों के जरिये करने को कहा है।

चौधरी कहती हैं कि संदेश सिर्फ चेतन मस्तिष्क को ही प्रभावित नहीं करते बल्कि अवचेतन मन को भी प्रभावित करते हैं। खास तौर पर फेसबुक और ट्विटर जैसे माध्यमों को जरिये प्रेषित किए जाने वाले संदेश। ये संदेश लोगों को आदी बनाने का काम करते हैं।

वे कहती हैं, ‘आप एक गलत बात को बार-बार स्पैम करना शुरू कीजिए। थोड़े समय बाद लोग उसे सच मानना शुरू कर देंगे। इसे गोएबल्स की पुरानी तकनीक कहा जाता है।’ मालूम हो कि पॉल जोसेफ गोएबल्स नाजी जर्मनी में 1933 से 1945 के दौरान अडोल्फ हिटलर के कार्यकाल में उनके करीबी सहयोगी और प्रोपगैंडा मंत्री थे।

फेसबुक के आलोचक कहते हैं कि फेसबुक फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए बोलने के अलावा कुछ नहीं करता। इसका पूरा कारोबारी मॉडल इस बात पर आधारित है कि कैसे कोई फेसबुक पोस्ट वायरल हो जाए। कोई भी पोस्ट जितना अधिक लोगों के बीच जाएगा, उससे फेसबुक को उतना ही आर्थिक लाभ होगा। जितना ज्यादा कोई व्यक्ति फेसबुक का इस्तेमाल करेगा और इस पर अपनी गतिविधियां चलाता रहेगा, उतना ही फेसबुक का फायदा होगा। 

फेसबुक के साथ तथ्यों की पड़ताल के लिए काम करने वाले एक व्यक्ति ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘भारत में फर्जी सूचनाओं के प्रसार को फेसबुक जन संपर्क की समस्या की तरह देख रही है। गलत सूचनाओं के प्रसार से निपटने के लिए काफी कुछ किया जा सकता है लेकिन फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह प्राथमिकता का विषय नहीं है। उनके लिए इस दिशा में कुछ कदम उठाने की बात करना सिर्फ औपचारिकता भर है।’ फेसबुक के साथ काम कर रहे इस अधिकारी की बातों से पता चलता है कि फेसबुक एक कंपनी के तौर पर अपने प्लेटफॉर्म से फर्जी सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है।

Date posted: February 11, 2019Last modified: February 13, 2019Posted byParanjoy Guha Thakurta
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