सोशल_मीडिया : कई देशों की सरकारें फेसबुक से क्यों खफा हैं?

वर्ष 2018 में फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पांच देशों की सरकारों ने व्यक्तिगत तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय समिति के सामने पेश होकर फर्जी खबरें और गलत सूचनाओं के प्रसार के बारे में अपनी बात रखने को कहा। ये पांच देश थे- अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, आयरलैंड और ब्रिटेन।

वहीं यूरोप के कई देशों में, अमेरिका में और सिंगापुर में फेसबुक के अधिकारियों की वहां के कानून बनाने वालों ने तीखी आलोचनाएं की हैं। इन्हें यह निर्देश दिया गया कि ये ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम करें। इन्हें यह भी कहा गया कि अगर इनके प्लेटफॉर्म का कोई दुरुपयोग होता है तो इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं।

भारत सरकार ने भी समय-समय पर फेसबुक की इस बात के लिए आलोचना की है कि इसके जरिये गलत सूचनाओं का प्रसार हो रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने फेसबुक को इन समस्याओं का समाधान ‘तकनीकी उपायों’ के जरिये करने को कहा है।

केंद्र सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद कानून मंत्रालय भी संभालते हैं। उन्होंने सितंबर, 2016 में पहली बार यह मांग उठाई कि फेसबुक फर्जी खबरों का प्रसार रोके। इसके बाद से उन्होंने कई बार यह मांग दोहराई है।

वे कहते हैं, ‘जब कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा अनुरोध किया जाए तो यह पता लगाना जरूरी है कि कोई आपत्तिजनक संदेश कहां से फैलना शुरू हुआ है। इस माध्यम के जरिये अफवाह फैलाने के मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। अगर वे मूक दर्शक बनकर बैठे रहते हैं तो वे भी इन चीजों को बढ़ावा देने के जिम्मेदार माने जाएंगे और उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।’

उसी महीने में पहली बार भारत सरकार ने व्हाट्सऐप से किसी संदेश के स्रोत के बारे में जानने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से दो नोटिस भेजे। मई से जुलाई, 2016 के बीच कम से कम तीन हत्याएं व्हाट्सऐप पर फर्जी खबरों के प्रसार से हुईं। राजस्थान के एक 26 साल के मजदूर की हत्या हुई। यह हत्या आईटी राजधानी माने जाने वाले बेंगलूरु में हुई। उसकी हत्या सिर्फ इसलिए हो गई कि व्हाट्सऐप पर एक फर्जी वीडियो का प्रसार हो गया जिसमें यह दावा किया गया कि बाहर से आने वाले लोग कर्नाटक से बच्चों की चोरी कर रहे हैं। महाराष्ट्र के धुले में पांच लोगों पर इसलिए हमला किया गया कि व्हाट्सऐप के एक फर्जी वीडियो में यह दावा किया गया था कि ये गिरोह मरे हुए बच्चों के अंग चुरा रहा है। इस वीडियो में 2013 में सीरिया में गैस हमले में मरे बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था। कर्नाटक के बिदर में 32 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की हत्या भीड़ ने कर दी सिर्फ इस शक के आधार पर कि एक वीडियो में यह कहा गया कि वह बच्चों का अपहरण कर रहा है। 

2017 के जून महीने में झारखंड के रामगढ़ में मीट व्यापारी अलीमुद्दीन अंसारी पर भी भीड़ ने हमला कर दिया। उनकी पत्नी और बेटे को अंसारी की हत्या की जानकारी एक तरह से लाइव ही व्हाट्सऐप के जरिये मिल रही थी लेकिन वे कुछ कर नहीं पाए। इस हत्या में शामिल कुछ लोगों को साल भर बाद केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने माला पहनाकर सम्मानित किया। बाद में उन्होंने इसके लिए माफी मांगी।

जुलाई, 2018 में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार व्हाट्सऐप का हर संदेश नहीं पढ़ना चाहती लेकिन फेसबुक के लिए यह कोई जटिल काम नहीं है कि वह अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके गलत सूचनाओं का प्रसार रोक सके। प्रसाद ने यह भी कहा कि व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कारोबारी तौर पर सफल हो सकते हैं लेकिन उन्हें जिम्मेदारी और जवाबदेही का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संदेशों के स्रोत पता करने के बारे में व्हाट्सऐप ने जो कदम उठाए हैं, वे सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं।

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Sue the Messenger
How legal harassment by corporates is shackling reportage and undermining democracy in India
 
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Crony Capitalism and the Ambanis
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