सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है?

व्हाट्सऐप क्या लोगों की सुरक्षा के बारे में चिंता करता है? यह सवाल जब व्हाट्सऐप से हमने पूछा तो उनके एक प्रवक्ता ने हमें तुरंत जवाब भेजा और कहा कि यह प्लेटफॉर्म जनता की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाट्सऐप भारत के शोध करने वालों के साथ मिलकर फर्जी खबरों का प्रसार रोकने और जन सुरक्षा अभियान चलाने की दिशा में काम कर रहा है। 

इसके कुछ समय बाद व्हाट्सऐप ने संदेशों के साथ ‘फॉरवर्ड’ टैग देना शुरू किया। इसका मतलब यह होता है कि संदेश भेजने वाले ने खुद यह संदेश नहीं बनाया बल्कि उसे भी कहीं से मिला है और वह उसे दूसरों को भेज रहा है। साथ ही व्हाट्सऐप ने एक बार में पांच ही लोगों को कोई संदेश फॉरवर्ड करने की सीमा भी तय कर दी।

30 अक्टूबर, 2018 को व्हाट्सऐप के वैश्विक प्रमुख क्रिस डेनियल्स की मुलाकात केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से हुई। इसके बाद व्हाट्सऐप के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘हमें केंद्रीय मंत्री प्रसाद के साथ सरकार के प्रमुख नेताओं से मिलने का मौका मिला। हम इसकी सराहना करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने हमारे उपभोक्ताओं के संदेशों के इन्क्रीप्शन और निजता का समर्थन किया। व्हाट्सऐप भारत की जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए सिविल सोसाइटी और सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चत करना चाहता है कि इस प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग न हो।’ 

हालांकि, ऐसी खबरें भी आईं कि डेनियल्स भारत सरकार से इस बात पर नाराज हैं कि व्हाट्सऐप को भुगतान की सेवा शुरू करने की मंजूरी नहीं मिली। डेनियल्स से मिलने वाले एक व्यक्ति ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि उन्हें लगता है कि व्हाट्सऐप उन सभी शर्तों को पूरा करता है जिन्हें पूरा करने पर पेटीएम और गूगल पे को मंजूरी मिली है। इस संदर्भ में उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि भारतीय नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सब के लिए समान अवसर उपलब्ध हों।

इन्क्रीप्शन और संदेशों के स्रोत के बारे में डेनियल्स की राय यह है कि व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म की परिकल्पना जिस तरह की थी, वह वैसा ही बना रहे। उनका मानना है कि व्हाट्सऐप लोगों के लिए निजी संवाद का माध्यम बना रहे और संदेशों के स्रोत का तब तक पता नहीं लगाया जा सकता जब तक पूरे सिस्टम को फिर से न डिजाइन किया जाए और प्राइवेसी से संबंधित नीतियों में बदलाव न किया जाए।  क्योंकि बगैर नीतियों में बदलाव किए लोगों के संदेशों की पड़ताल नहीं की जा सकती है।

डेनियल्स का यह भी मानना है कि सिर्फ कानून पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है बल्कि लोगों में इस बात को लेकर जागरूकता लानी होगी कि कैसे सुरक्षित रहा जाए। इसमें वे सभी सहभागियों तकनीकी कंपनियों, सिविल सोसाइटी और भारत सरकार की भूमिका देखते हैं।

Featured Book: As Author
The Real Face of Facebook in India
How Social Media Have Become a Weapon and Dissemninator of Disinformation and Falsehood
  • Authorship: Cyril Sam and Paranjoy Guha Thakurta
  • Publisher: Paranjoy Guha Thakurta
  • 214 pages
  • Published month:
  • Buy from Amazon
 
Featured Book: As Publisher
Idea of India Hard to Beat
Republic Resilient