सोशल मीडिया पर मोदी के पक्ष में माहौल बनाने वाले अहम किरदार कौन-कौन हैं?

जनवरी, 2009 में भाजपा को एसएमएस भेजने के लिए किसी कंपनी की तलाश थी। इस प्रक्रिया में मौजूदा रेल मंत्री पीयूष गोयल के संपर्क में उस वक्त नेटकोर के राजेश जैन आए। राजेश जैन की कंपनी को यह काम मिल गया। 

राजेश जैन का परिवार पीढ़ियों से भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करता आया है। यह ठेका मिलने के कुछ समय बाद राजेश जैन ने पूर्व बैंकर अमित मालवीय, वकील हितेश जैन और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक टीम बनाई। अमित मालवीय अभी भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख हैं। 

राजेश जैन ने जनवरी, 2009 में बनी इस टीम को नाम दिया ‘फेंड्स ऑफ बीजेपी’, इस टीम को यह काम दिया गया कि वह मध्य वर्ग के लोगों को मोदी का साथ देने के लिए तैयार करे। टीम की शुरुआती कोशिशों से भाजपा को कोई खास लाभ नहीं हुआ। उस साल हुए 15वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हार हुई।

तकरीबन साल भर बाद अप्रैल, 2010 में राजेश जैन की मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई। इसके बाद जैन ने फिर से पूरी ताकत से काम करना शुरू किया। वे लोकसभा चुनावों को मोदी के पक्ष में ‘लहर वाला चुनाव’ बनाना चाह रहे थे। ये उन्होंने जून, 2011 में खुद एक वेबसाइट पर अपने लेख में लिखा है। 

उस साल राजेश जैन की कोशिशों का कुछ लाभ दिखने लगा। कई बार वे मोदी से मिले। फिर उनकी मुलाकात डॉ. हीरेन जोशी से भी हुई। गुजरात में मोदी के चहेते लोगों में से हीरेन जोशी रहे हैं। 18 साल तक शिक्षण के काम में रहे जोशी को मोदी मुख्यमंत्री रहते हुए अपने साथ काम करने लाए थे। अभी हीरेन जोशी प्रधानमंत्री कार्यालय में ओएसडी के पद पर काम कर रहे हैं और सूचना प्रौद्योगिकी का काम देखते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हीरेन जोशी और भी कई क्षेत्रों में दखल रखते हैं।

जैन ने उस वक्त नीति डिजिटल की शुरुआत की। इसका पूरा नाम था न्यू इनिशिएटिव टू ट्रांसफॉर्म इंडिया। जैन ने नीतिसेंट्रल डॉट कॉम के नाम से एक वेबसाइट की शुरुआत की। पत्रकार कंचन गुप्ता को इसका संपादकीय प्रमुख बनाया गया। इस वेबसाइट पर भाजपा के अनुकूल खबरें और विचार प्रकाशित किए जा रहे थे। कंचन गुप्ता इसके पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा के साथ काम कर चुके थे। 

कुछ ही सालों में नीतिसेंट्रल ने मोदी के पक्ष में हवा बनाने में मुख्य भूमिका निभाना शुरू कर दिया। जैन ने इंडिया272 डॉट कॉम भी शुरू किया। लोकसभा में 272 सीटों पर बहुमत मिल जाता है। इस काम में उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमी बी.जी. महेश और इन्फोसिस में काम करने का अनुभव रखने वाले शशि शेखर का साथ लिया। शशि शेखर अभी प्रसार भारती के प्रमुख हैं जो सरकारी दूरदर्शन और आकाशवाणी चलाता है। बाद में जैन 272 प्लस अभियान में भी शामिल हो गए जो 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए चलाया गया।

हमने नरेंद्र मोदी का पूरा सोशल मीडिया अभियान डिजाइन करने और इसके क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाने वाले राजेश जैन से उनकी भूमिका के बारे में बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया।

एनडीटीवी में एंकर रहे शिवनाथ ठुकराल वहां से निकलने के बाद एस्सार समूह और कार्नेगी फाउंडेशन में काम करने के बाद फेसबुक इंडिया में चले गए। उन दिनों ठुकराल ने इन्वेस्टमेंट बैंकर रहे अनुज गुप्ता के साथ मिलकर ‘मेरा भरोसा’ और अन्य ऐसे वेब पेज बनाने में हीरेन जोशी की मदद की। गुप्ता लंबे समय तक पीयूष गोयल के साथ जुड़े रहे हैं। अभी वे रेल मंत्री पीयूष गोयल के ओएसडी के पद पर काम कर रहे हैं।

Featured Book: As Author
Sue the Messenger
How legal harassment by corporates is shackling reportage and undermining democracy in India
 
Featured Book: As Publisher
Corruption, CBI and I
More than Memoirs of a Veteran Scam-Buster
  • Authorship: Shantonu Sen with Sanjukta Basu
  • Publisher: Paranjoy Guha Thakurta
  • 260 pages
  • Published month:
  • Buy from Amazon