India France Deal : राष्ट्रीय सुरक्षा या वित्तीय अनियमितता? 2016 में 36 Rafale सौदे पर सवाल

RTI Files Ep 4: राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पुस्तक “फ्लाइंग लाइज़ (सफेद झूठ)” के लेखकों और कुछ पूर्व अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि 126 विमानों की पूर्व प्रक्रिया को रद्द कर 36 राफेल की नई डील जल्दबाज़ी में की गई, जिससे लागत बढ़ी और एचएएल को दरकिनार किया गया। ऑफसेट साझेदारी में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकार का पक्ष है कि यह निर्णय वायुसेना की तत्काल ज़रूरत और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट और सीएजी की टिप्पणियाँ भी बहस के केंद्र में हैं।

भारत ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है, जो करीब ₹3.25 लाख करोड़ का बड़ा सौदा है। यह IAF को मजबूत बनाने का कदम है, जिसमें 18 विमान तैयार हालत में आएंगे और बाकी 96 भारत में बनेंगे, स्वदेशी सामग्री 50-60% तक लक्ष्य के साथ। नागपुर में फाइनल असेंबली लाइन की बात चल रही है, जहां Dassault Reliance Aviation Limited (DRAL) पहले से स्पेयर पार्ट्स बना रही है। अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस अब DRAL में सिर्फ 49% हिस्सेदार है, क्योंकि 2025 में दसॉ ने बहुमत (51%) हासिल कर लिया। 

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Featured Book: As Author
Flying Lies?
The Role of Prime Minister Narendra Modi in India's Biggest Defence Scandal
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Pegasus Deposition

Link of the recording of the 70-minute deposition on 14 February 2022 by Paranjoy Guha Thakurta to the Supreme Court-appointed committee headed by Justice (retired) R V Raveendran on allegations of misuse of the Israeli Pegasus spyware on Indian citizens: https://pegasus-india-investigation.in/depositions/paranjoy-guha-thakurta-statement/